प्लूटो (बौना ग्रह)

यम या प्लूटो सौर मण्डल का दुसरा सबसे बड़ा बौना ग्रह है (सबसे बड़ा ऍरिस है)। प्लूटो को कभी सौर मण्डल का सबसे बाहरी ग्रह माना जाता था, लेकिन अब इसे सौर मण्डल के बाहरी काइपर घेरे की सब से बड़ी खगोलीय वस्तु माना जाता है। काइपर घेरे की अन्य वस्तुओं की तरह प्लूटो का अकार और द्रव्यमान काफ़ी छोटा है - इसका आकार पृथ्वी के चन्द्रमा से सिर्फ़ एक-तिहाई है। सूरज के इर्द-गिर्द इसकी परिक्रमा की कक्षा भी थोड़ी बेढंगी है - यह कभी तो वरुण (नॅप्टयून) की कक्षा के अन्दर जाकर सूरज से ३० खगोलीय इकाई (यानि ४.४ अरब किमी) दूर होता है और कभी दूर जाकर सूर्य से ४५ ख॰ई॰ (यानि ७.४ अरब किमी) पर पहुँच जाता है। प्लूटो काइपर घेरे की अन्य वस्तुओं की तरह अधिकतर जमी हुई नाइट्रोजन की बर्फ़, पानी की बर्फ़ और पत्थर का बना हुआ है। प्लूटो को सूरज की एक पूरी परिक्रमा करते हुए २४८.०९ वर्ष लग जाते हैं।[11][12]

प्लूटो  
यम ग्रह का चित्र, जिसे न्यू होराइज़न्स नामक अंतरिक्षयान ने 13 जुलाई 2015 को लिया।
खोज
खोज कर्ता क्लाइड टॉमबॉ
खोज की तिथि 18 फरवरी 1930
उपनाम
MPC designation 134340 Pluto
क्षुद्र ग्रह श्रेणी
विशेषण प्लूटोनियम
युग J2000
उपसौर
  • 48.871 AU
  • (7,31,10,00,000 km)
अपसौर
  • 29.657 AU
  • (4,43,70,00,000 km)
  • (5 सितम्बर 1989)[2]
अर्ध मुख्य अक्ष
  • 39.264 AU
  • (5,87,40,00,000 km)
विकेन्द्रता 0.244671664 (J2000)
0.248 807 66 (mean)[3]
परिक्रमण काल
  • 247.68 वर्ष[3]
  • 90,465 days[3][4]
  • 14,164.4 प्लूटोनियन सौर दिवस[4]
संयुति काल 366.73 दिन[3]
औसत परिक्रमण गति 4.7 km/s[3]
औसत अनियमितता 14.85 डिग्री
झुकाव
  • 17.151394 °
  • (11.88° सूर्य की भूमध्य रेखा की तरफ)
आरोही ताख का रेखांश 110.28683 °
उपमन्द कोणांक 113.76349 °
उपग्रह 5
भौतिक विशेषताएँ
माध्य त्रिज्या
तल-क्षेत्रफल
आयतन
द्रव्यमान
माध्य घनत्व 2.29±0.6 g/cm3[6]
विषुवतीय सतह गुरुत्वाकर्षण
नाक्षत्र घूर्णन
काल
  • 6.38723 day
  • 6 d, 9 h, 17 m, 36 s
विषुवतीय घूर्णन वेग 47.18 km/h
अक्षीय नमन 119.591±0.14 ° (कक्षा की तरफ)[6][lower-alpha 5]
उत्तरी ध्रुव दायां अधिरोहण 132.993°[7]
उत्तरी ध्रुवअवनमन −6.163°[7]
अल्बेडो0.49 to 0.66 (ज्यामितीय, 35% तक तब्दीली)[3][8]
सतह का तापमान
   केल्विन
न्यूनमाध्यअधि
33 K44 K (−229° सें)55 K
सापेक्ष कांतिमान 13.65[3] to 16.3[9]
(mean is 15.1)[3]
निरपेक्ष कांतिमान (H) −0.7[10]
कोणीय व्यास 0.065″ to 0.115″[3][lower-alpha 6]
वायु-मंडल
सतह पर दाब 0.30 पास्कल (गर्मियों में अधिकतम)
संघटन नाइट्रोजन, मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड

रंग-रूप

प्लूटो की सतह पर बैठे हुए नज़ारा - कम्प्यूटर पर रचित काल्पनिक चित्र

प्लूटो का व्यास लगभग २,३०० किमी है, यानि पृथ्वी का १८%। उसका रंग काला, नारंगी और सफ़ेद का मिश्रण है। कहा जाता है के जितना अंतर प्लूटो के रंगों के बीच में है इतना सौर मण्डल की बहुत कम वस्तुओं में देखा जाता है, यानि उनपर रंग अधिकतर एक-जैसे ही होते हैं। सन् १९९४ से लेकर २००३ तक किये गए अध्ययन में देखा गया के प्लूटो के रंगों में बदलाव आया है। उत्तरी ध्रुव का रंग थोड़ा उजला हो गया था और दक्षिणी ध्रुव थोड़ा गाढ़ा। माना जाता है के यह प्लूटो पर बदलते मौसमों का संकेत है।

वायुमंडल

प्लूटो की कक्षा (लाल रंग में) बाक़ी ग्रहों की कक्षा से कोण पर है (वरुण की कक्षा नीले में है)
प्लूटो की कक्षा (लाल रंग) कभी तो वरुण की कक्षा (नीला रंग) के अन्दर होती है और कभी बाहर

प्लूटो का बहुत पतला वायुमंडल है जिसमें नाइट्रोजन, मीथेन और कार्बन मोनोऑक्साईड है। जब प्लूटो परिक्रमा करते हुए सूरज से दूर हो जाता है तो उस पर ठण्ड बढ़ जाती है और इन्ही गैसों का कुछ भाग जमकर बर्फ़ की तरह उसकी सतह पर गिर जाता है, जिस से उसका वायुमंडल और भी पतला हो जाता है। जब प्लूटो सूरज के पास आता है तब उसकी सतह पर पड़ी इसी बर्फ़ का कुछ भाग गैस बनकर वायुमंडल में आ जाता है।

चन्द्रमा

यम के उपग्रह

प्लूटो के पाँच ज्ञात उपग्रह हैं - १९७८ में खोज किया गया शैरन जो कि सबसे बड़ा है और जिसका व्यास यम का आधा है, २००५ में खोज किये गए दो नन्हे चन्द्रमा, निक्स और हाएड्रा, स्टिक्स और २० जुलाई २०११ को घोषित किया गया कर्बेरॉस जो कि आकार में ३० कि.मी. चौडा है। शैरन सबसे बड़ा है और प्लूटो के ज्यादा करीब भी है। इनकी कक्षाओं का केन्द्र (बैरीसेन्टर) इनके अंदर ना होकर कहीं बीच में है। इसलिए कभी कभी इन्हें युग्मक (जोडा) वाले ग्रह भी कहा जाता है जो एक दूसरे के साथ साथ चलते हैं। [13] अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ ने अभी तक युग्मक बौने ग्रहों की कोई ठोस परिभाषा नहीं गढी है इसलिए फिलहाल आधिकारिक तौर पर शैरोन को यम का उपग्रह ही माना जाता है।[14]

ग्रह या बौना ग्रह

१९३० में अमेरिकी खगोलशास्त्री क्लाइड टॉमबौ ने प्लूटो को खोज निकाला और इसे सौर मण्डल का नौवा ग्रह मान लिया गया। धीरे-धीरे प्लूटो के बारे में कुछ ऐसी चीजें पता चलीं जो अन्य ग्रहों से अलग थीं -

  • इसकी कक्षा अजीब थी। बाक़ी ग्रह एक के बाहर एक अंडाकार कक्षाओं में सूरज की परिक्रमा करते हैं लेकिन प्लूटो की कक्षा वरुण की कक्षा की तुलना में कभी सूरज के ज़्यादा समीप होती है और कभी कम।
  • इसकी कक्षा बाक़ी ग्रहों की कक्षा की तुलना में ढलान पर थी। बाक़ी ग्रहों की कक्षाएँ किसी एक ही चपटे चक्र में हैं, जिस तरह जलेबी के लच्छे एक ही चपटे अकार में होते हैं। प्लूटो की कक्षा इस चपटे चक्र से कोण पर थी। ध्यान रहे के इस कोण की वजह से प्लूटो और वरुण की कभी टक्कर नहीं हो सकती क्योंकि उनकी कक्षाएँ एक दुसरे को कभी काटती नहीं हालांकि चित्रों में कभी ऐसा लगता ज़रूर है।
  • इसका आकार बहुत ही छोटा था। इस से पहले सब से छोटा ग्रह बुध (मरक्युरी) था। प्लूटो बुध से आधे से भी छोटा था।

इन बातों से खगोलशास्त्रियों के मन में शंका बन गयी थी के कहीं प्लूटो वरुण का कोई भागा हुआ उपग्रह तो नहीं, हालांकि इसकी सम्भावना भी कम थी क्योंकि प्लूटो और वरुण परिक्रमा करते हुए कभी ज़्यादा पास नहीं आते। फिर, सन् १९९० के बाद, वैज्ञानिकों को बहुत सी वरुण-पार वस्तुएँ मिलने लगीं जिनकी कक्षाएँ, रूप-रंग और बनावट प्लूटो से मिलती जुलती थीं। आज वैज्ञानिकों ने यह पहचान लिया है के सौर मण्डल के इस इलाक़े में एक पूरा घेरा है जिसमें ऐसी ही वस्तुएँ पायी जाती हैं जिनमें से प्लूटो सिर्फ़ एक है। इसी घेरे का नाम काइपर घेरा रखा गया।

२००४-२००५ में इसी काइपर घेरे में हउमेया और माकेमाके मिले जो काफ़ी बड़े थे (हालांकि प्लूटो से थोड़े छोटे थे)। २००५ में काइपर घेरे से भी बाहर ऍरिस मिला, जो प्लूटो से बड़ा था। यह सारे अन्य ग्रहों से अलग और प्लूटो से मिलते जुलते थे। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ असमंजस में पड़ गया क्योंकि लगने लगा के ऐसी कितनी ही वस्तुएँ आने वाले सालों में मिलेंगी। या तो यह सब ग्रह थे या फिर प्लूटो को ग्रह बुलाना बंद करके कुछ और बुलाने की ज़रुरत थी। १३ सितम्बर २००६ को इस संघ ने ऐलान किया के प्लूटो ग्रह नहीं है और उन्होंने एक नई "बौना ग्रह" की श्रेणी स्थापित करी। प्लूटो, हउमेया, माकेमाके और ऍरिस अब बौने ग्रह कहलाते हैं।[15]

न्यू होराइज़न्स

न्यू होराइज़न्स अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसन्धान संस्था नासा का एक अंतरिक्ष शोध यान है जो प्लूटो के अध्ययन के लिये छोड़ा गया था। इस यान का प्रक्षेपण 19 जनवरी 2006 को किया गया था जो नौ वर्षों के बाद 14 जुलाई 2015 को प्लूटो के सबसे नजदीक से होकर गुजरा।[16] प्लूटो और इसके उपग्रह शैरन के सबसे नज़दीक से यह यान 14 जुलाई 2015 को 12:03:50 (UTC) बजे गुजरा। इस समय इस यान की प्लूटो से दूरी लगभग 12,500 किलोमीटर थी और यह लगभग 14 किलोमीटर प्रति सेकेण्ड के वेग से गुजार रहा था[17][18]

इन्हें भी देखें

References

  1. "HORIZONS Web-Interface for Pluto Barycenter (Major Body=9)". JPL Horizons On-Line Ephemeris System. अभिगमन तिथि 11 October 2012. Select "Ephemeris Type: Elements", "Target Body: Pluto Barycenter" and "Center: @Sun".
  2. "Horizon Online Ephemeris System for Pluto Barycenter". JPL Horizons On-Line Ephemeris System @ Solar System Dynamics Group. अभिगमन तिथि 16 January 2011. (set Observer Location to @sun to place the observer at the center of the sun)
  3. Williams, David R. (7 September 2006). "Pluto Fact Sheet". NASA. अभिगमन तिथि 24 March 2007.
  4. Seligman, Courtney. "Rotation Period and Day Length". अभिगमन तिथि 13 August 2009.
  5. लकडावाला, एमिली. "Pluto minus one day: Very first New Horizons Pluto encounter science results". द प्लेनेट्री सोसाइटी. अभिगमन तिथि 13 जुलाई 2015.
  6. Buie, Marc W.; Grundy, William M.; Young, Eliot F.; एवं अन्य (2006). "Orbits and photometry of Pluto's satellites: Charon, S/2005 P1, and S/2005 P2". Astronomical Journal. 132 (1): 290. arXiv:astro-ph/0512491. डीओआइ:10.1086/504422. बिबकोड:2006AJ....132..290B.
  7. doi:10.1007/s10569-010-9320-4
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  8. हैम्ल्टन, कैल्विन जे. (12 फरवरी 2006). "Dwarf Planet Pluto [बौना ग्रह यम]". व्यूज़ ऑफ द सोलर सिस्टम. अभिगमन तिथि 10 जनवरी 2007.
  9. "AstDys (134340) Pluto Ephemerides". गणित विभाग, पीसा का विश्वविद्यालय, इटली. अभिगमन तिथि 27 जून 2010.
  10. "JPL Small-Body Database Browser: 134340 Pluto". अभिगमन तिथि 12 जून 2008.
  11. बैरी डब्ल्यु. जोन्स (2010). Pluto: Sentinel of the Outer Solar System (अंग्रेज़ी में). कैम्ब्रिज विश्वविद्मालय प्रेस. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-521-19436-5.
  12. पैट्रिक मूर, रोबिन रीस (2011). "... Pluto ... 248.09 years (90,613.3 days) ...". Patrick Moore's Data Book of Astronomy (अंग्रेज़ी में). कैम्ब्रिज विश्वविद्मालय प्रेस. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-521-89935-2.
  13. ऑल्किन, कैथरीन बी.; वैसरमैन, लॉरेन्स एच.; फ्रैन्ज़, ओट्टो जी. (2003). "The mass ratio of Charon to Pluto from Hubble Space Telescope astrometry with the fine guidance sensors" [हब्बल अंतरिक्ष दूरदर्शी के संवेदकों द्वारा नापा गया शैरोन से यम के द्रव्यमान का अनुपात] (PDF). इकरस (अंग्रेज़ी में). लॉवेल वेधशाला. 164 (1): 254–259. डीओआइ:10.1016/S0019-1035(03)00136-2. बिबकोड:2003Icar..164..254O. अभिगमन तिथि 13 March 2007.
  14. ""Pluto and the Developing Landscape of Our Solar System"" [यम और हमारे सौर मंडल के विकसित होते परिदृश्य]. अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ. अभिगमन तिथि १४ जुलाई २०१५.
  15. The hunt for planet X: new worlds and the fate of Pluto, Govert Schilling, स्प्रिंगर, 2009, ISBN 978-0-387-77804-4
  16. "प्लूटो पहुंचा अंतरिक्ष यान". अभिगमन तिथि 14 जुलाई 2015.
  17. "New Horizons to Pluto, Mission Website". US National Aeronautics and Space Administration (NASA). 2 July 2015. अभिगमन तिथि 7 July 2015.
  18. "New Horizons: Nasa spacecraft speeds past Pluto" (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 14 जुलाई 2015.
सौर मण्डल
सूर्यबुधशुक्रचन्द्रमापृथ्वीPhobos and Deimosमंगलसीरिस)क्षुद्रग्रहबृहस्पतिबृहस्पति के उपग्रहशनिशनि के उपग्रहअरुणअरुण के उपग्रहवरुण के उपग्रहनेप्चूनप्लूटो ग्रहकाइपर घेराएरिसबिखरा चक्रऔर्ट बादल
सूर्य · बुध · शुक्र · पृथ्वी · मंगल · सीरीस · बृहस्पति · शनि · अरुण · वरुण · यम · हउमेया · माकेमाके · एरिस
ग्रह · बौना ग्रह · उपग्रह - चन्द्रमा · मंगल के उपग्रह · क्षुद्रग्रह · बृहस्पति के उपग्रह · शनि के उपग्रह · अरुण के उपग्रह · वरुण के उपग्रह · यम के उपग्रह · एरिस के उपग्रह
छोटी वस्तुएँ:   उल्का · क्षुद्रग्रह (क्षुद्रग्रह घेरा‎) · किन्नर · वरुण-पार वस्तुएँ (काइपर घेरा‎/बिखरा चक्र) · धूमकेतु (और्ट बादल)
  1. Orbital elements refer to the barycenter of the Pluto system, and are the instantaneous osculating values at the precise J2000 epoch. Barycenter quantities are given because, in contrast to the planetary center, they do not experience appreciable changes on a day-to-day basis from the motion of the moons. The orbital period of Pluto is listed as 248 years because most references use the more stable barycenter of the Solar System (Sun+Jupiter) to list the orbital period of the Pluto-Charon system. A J2000 heliocentric solution would give a value of 246 years.
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