मही नदी
मही नदी पश्चिमी भारत की एक प्रमुख नदी हैं। मही का उद्गम मध्यप्रदेश के धार जिला के समीप मिन्डा ग्राम की विंध्याचल पर्वत श्रेणी से हुआ है। यह दक्षिणी अरावली में जयसमन्द झील से प्रारम्भ होती है। यह मध्य प्रदेश के धार, झाबुआ और रतलाम जिलों तथा गुजरात राजस्थान राज्य से होती हुई खंभात की खाड़ी द्वारा अरब सागर में गिरती है।[1][2]
मही नदी Mahi River / મહી નદી | |
नदी | |
![]() मही नदी | |
देश | ![]() |
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राज्य | मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात |
स्रोत | |
- स्थान | विंध्य पर्वत (मध्य प्रदेश) |
- ऊँचाई | 4,800 मी. (15,748 फीट) |
मुहाना | 22°16′N 72°58′E |
- स्थान | खम्बात की खाड़ी (गुजरात) |
लंबाई | ल कि.मी. ( मील) |
प्रवाह | |
- औसत | 383 मी.³/से. ( घन फीट/से.) |
इसकी दक्षिणी-पूर्वी शाखा बांसवाड़ा जिले से विपरीत दिशा में आकर मिलती है। इस पर मही बजाज सागर एवं कडाणा बाँध बनाये गए हैं। यह खम्भात की खाड़ी में गिरती है। इसकी कुल लम्बाई लगभग 576 किलोमीटर है। मही भारत की एकमात्र ऐसी नदी है जो कर्क रेखा को दो बार काटती है। यह भारत की पवित्र नदियो मे से एक है। मही पर एक जलविद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने का एक बाँध है जो गुजरात के महीसागर ज़िले में स्थित है और कदाणा बाँध कहलाता है।
इन्हें भी देंखे
बाहरी कड़ियाँ
सन्दर्भ
- "Gazetteers: Panchmahals District," Volume 9 of Gazetteers, Gujarat (India), Directorate of Government Printing, Government of India, 1972
- "India Guide Gujarat," Anjali H. Desai, Vivek Khadpekar, India Guide Publications, 2007, ISBN 9780978951702
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